
रायपुर: भाजपा कार्यकर्ता गोलू गौली और वसीद खान पर बड़ा आरोप, 3 एकड़ खदान पाटकर अवैध प्लॉटिंग का ‘खेल’
रायपुर। राजधानी रायपुर में भू-माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब सरकारी नियमों को ताक पर रखकर पुरानी खदानों को ही ठिकाने लगाया जा रहा है। ताजा मामला सामने आया है, जहां भाजपा कार्यकर्ता गोलू गौली और उनके पार्टनर वसीद खान की जोड़ी पर लगभग 3 एकड़ की एक गहरी खदान को पाटकर वहां अवैध रूप से करोड़ों की प्लॉटिंग करने का गंभीर आरोप लगा है।
करोड़ों का खेल: बिना डायवर्जन, बिना अनुमति धड़ल्ले से बिक रहे प्लॉट
स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गोलू गौली और वसीद खान की जोड़ी ने अवैध रूप से खदान क्षेत्र को मलबे से भरकर समतल कर दिया है। आरोप है कि इस जमीन का न तो भू-उपयोग परिवर्तन (Diversion) कराया गया है और ना ही नगर एवं ग्राम निवेश (T&CP) से कोई लेआउट पास है। बिना किसी वैध अनुमति के यहां धड़ल्ले से प्लॉट काटकर बेचे जा रहे हैं, जिससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व की चपत लग रही है।
प्रशासनिक अमला मौन, ‘राजनीतिक’ संरक्षण के लग रहे आरोप
हैरानी की बात यह है कि इस अवैध कारोबार की जानकारी क्षेत्र के पटवारी, तहसीलदार, पार्षद और नगर निगम के जोन आयुक्त तक को है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इलाके में चर्चा है कि सत्ता पक्ष से जुड़े होने के कारण गोलू गौली को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते अधिकारी कार्रवाई करने से बच रहे हैं।
सुरक्षा पर बड़ा खतरा: मलबे पर खड़ी होगी कॉलोनी?
विशेषज्ञों का कहना है कि खदान को पाटकर बनाई गई जमीन पर निर्माण करना तकनीकी रूप से बेहद जोखिम भरा है। बिना Soil Stability Test (मिट्टी की मजबूती की जांच) के यहां मकान बनाना भविष्य में जान-माल की हानि का सबब बन सकता है। हल्की सी बारिश या भूकंप की स्थिति में यहां भूमि धंसाव का बड़ा खतरा बना रहेगा।
जोन आयुक्त का विवादित बयान: “जब करना होगा, तब करूंगा”
इस पूरे मामले में नगर निगम जोन क्रमांक-6 के आयुक्त हितेन यादव की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जब उनसे इस अवैध प्लॉटिंग पर कार्रवाई के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मीडिया से कहा—
“मैं अपने हिसाब से कार्रवाई करूंगा, जब करना होगा तब करूंगा।”
इससे पहले उन्होंने मौके पर लगे खंभों को ध्वस्त करने का आश्वासन दिया था, लेकिन धरातल पर अब तक कुछ नहीं बदला है। इसके विपरीत, वहां विकास कार्य और तेजी से जारी हैं।
प्रमुख सवाल जिनका जवाब प्रशासन को देना होगा:
• क्या खदान भरने के लिए पर्यावरण या खनन विभाग से एनओसी ली गई?
• बिना वैध लेआउट और डायवर्जन के प्लॉट की रजिस्ट्री कैसे संभव हो रही है?
• क्या नगर निगम के अधिकारी जानबूझकर भू-माफियाओं को रास्ता दे रहे हैं?
• कल को अगर कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
कार्रवाई की मांग
क्षेत्रीय नागरिकों ने मांग की है कि इस अवैध प्लाटिंग को तत्काल रोककर दोषियों पर FIR दर्ज की जाए। यदि प्रशासन ने जल्द ही कड़ा रुख नहीं अपनाया, तो यह मामला एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।












