
रायपुर की स्वर्णभूमि टाउनशिप विवादों में: निर्माण और प्लॉटिंग को लेकर सरकार से उच्चस्तरीय जांच की मांग
रायपुर। राजधानी की प्रतिष्ठित स्वर्णभूमि टाउनशिप एक बार फिर कानूनी और प्रशासनिक सवालों के घेरे में है। टाउनशिप में भूमि उपयोग, निर्माण कार्यों और प्लॉटिंग नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव को एक विस्तृत शिकायत सौंपी गई है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
जांच के दायरे में ‘फॉर्च्यून रिसोर्सेज’ के कार्य
शिकायत में टाउनशिप का विकास करने वाली कंपनी फॉर्च्यून रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। मुख्य आरोप यह है कि परियोजना के विभिन्न चरणों में मिली स्वीकृतियों और जमीन पर वास्तविक निर्माण के बीच विसंगतियां हो सकती हैं।
शिकायत के मुख्य बिंदु:
• स्वीकृत लेआउट बनाम जमीनी हकीकत: टाउनशिप को 2012 से 2023 के बीच चार चरणों में मंजूरी मिली। शिकायतकर्ता का दावा है कि स्वीकृत मानचित्र और वर्तमान भौतिक स्थिति में अंतर है, जिसकी समीक्षा अनिवार्य है।
• भूमि उपयोग (Land Use): मुख्य प्रवेश द्वार और आसपास के निर्माण कार्यों की राजस्व स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं। क्या जमीन का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए हो रहा है जिसकी अनुमति ली गई थी?
• सड़क संपर्क और पहुंच मार्ग: टाउनशिप को जोड़ने वाली मुख्य और आंतरिक सड़कों के निर्माण की वैधता पर स्पष्टता मांगी गई है। मांग है कि यदि स्वीकृतियां ली गई हैं, तो रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं।
• प्लॉटिंग और कॉलोनाइजर नियम: क्या प्लॉटिंग और पहुंच मार्गों का निर्माण ‘नगर नियोजन’ और ‘कॉलोनाइजर एक्ट’ के प्रावधानों के अनुरूप है? इसकी स्थल निरीक्षण के जरिए जांच की मांग की गई है।
• वित्तीय विसंगतियां: शिकायत में प्लॉट बिक्री और रजिस्ट्री में दर्ज मूल्यों की भी जांच करने का आग्रह किया गया है ताकि राजस्व हानि की संभावना को स्पष्ट किया जा सके।
इन विभागों को भेजी गई शिकायत की प्रति
मामले की गंभीरता को देखते हुए, शिकायत की प्रतियां केवल उपमुख्यमंत्री कार्यालय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निम्नलिखित विभागों को भी भेजी गई हैं:
1. राजस्व विभाग एवं मुख्य सचिव कार्यालय
2. नगर एवं ग्राम निवेश (T&CP) विभाग
3. जिला प्रशासन एवं नगर निगम, रायपुर
4. GST और आयकर विभाग (वित्तीय पहलुओं की जांच हेतु)
निष्कर्ष: वर्तमान में गेंद प्रशासन के पाले में है। यदि इन आरोपों की जांच शुरू होती है, तो यह रायपुर के रियल एस्टेट क्षेत्र में एक बड़ा मामला बन सकता है। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग दस्तावेजों की समीक्षा और स्थल निरीक्षण को लेकर क्या रुख अपनाते हैं।













