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जहां तलवारे लहराती थी वहां किताबों के पन्नों की सरसराहट की आवाज, कुटरा की क्रांति पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संज्ञान….

शुभम् मरकाम 

मितान भूमि समाचार

जहां तलवारे लहराती थी वहां किताबों के पन्नों की सरसराहट की आवाज, कुटरा की क्रांति पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संज्ञान….

जांजगीर-चाम्पा।जिस कुटरा गांव की पहचान कभी खूनी संघर्ष, नरसंहार और भय के साए से होती थी, आज वही कुटरा शिक्षा, बदलाव और सामाजिक क्रांति का प्रतीक बन गया है। इस ऐतिहासिक परिवर्तन ने न सिर्फ मीडिया और सोशल मीडिया को झकझोरा है, बल्कि सत्ता के शीर्ष तक हलचल पैदा कर दी है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कुटरा में शिक्षा की मशाल जलाने वाले राघवेन्द्र पाण्डेय से सीधा संवाद कर पूछा है— “बताइए, सरकार आपकी क्या सहायता कर सकती है?”

यह कोई औपचारिक संदेश नहीं, बल्कि उस जनआंदोलन की स्वीकारोक्ति है, जिसे एक साधारण व्यक्ति ने अपने संकल्प से खड़ा किया।

सिस्टम फेल, तब समाज आगे आया

कुटरा में कभी हालात ऐसे थे कि आठवीं के बाद बच्चों की पढ़ाई लगभग खत्म हो जाती थी। शिक्षा के अभाव में पीढ़ियाँ बर्बाद हो रही थीं, बेटियाँ अवसरों से वंचित थीं और गांव छोड़ना मजबूरी बन चुका था। तब नीतियाँ काग़ज़ों में थीं और ज़मीनी हकीकत खून से सनी हुई थी।

उसी अंधकार में राघवेन्द्र पाण्डेय ने शिक्षा को हथियार बनाया और गांव के भविष्य की लड़ाई शुरू की।

जब स्कूल को भगाने की तैयारी थी, तब रखी गई नींव

वर्ष 2008 में हाई स्कूल की स्वीकृति तो मिली, लेकिन बेज़ा कब्ज़ों और प्रशासनिक उदासीनता के चलते स्कूल भवन नहीं बन पाया। हालात यहाँ तक पहुँच गए कि हाई स्कूल को दूसरे गांव शिफ्ट करने की तैयारी होने लगी।

यहीं से संघर्ष ने राजनीतिक रूप लिया। तत्कालीन सरपंच राजू कश्यप के अनुरोध पर 2014 में राघवेन्द्र पाण्डेय ने अपने निजी संसाधन और ज़मीन देकर स्कूल भवन की नींव रखी। आज जिस रामसरकार शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल पर कुटरा को गर्व है, उसकी ज़मीन का बड़ा हिस्सा पाण्डेय परिवार की निजी तालाब भूमि है।

एक व्यक्ति बनाम दशकों की हिंसा

जिस इलाके में दशकों तक बंदूकें नीति तय करती रहीं, वहाँ एक व्यक्ति ने किताबों से सत्ता की दिशा मोड़ दी। आज कुटरा में हायर सेकेंडरी स्कूल, अस्पताल, नर्सिंग कॉलेज और मेडिकल कॉलेज का निर्माण हो रहा है। यह विकास किसी फाइल की देन नहीं, बल्कि ज़मीनी संघर्ष का नतीजा है।

गांव के लोग साफ कहते हैं—

“अगर समय रहते राघवेन्द्र पाण्डेय ने हाई स्कूल की नींव नहीं रखी होती, तो कुटरा की कई पीढ़ियाँ अंधेरे में दफन हो जातीं।”

मुख्यमंत्री का संदेश: सत्ता ने माना जनसंघर्ष

राघवेन्द्र पाण्डेय द्वारा साझा किए गए संदेश के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गांव की प्रगति को लेकर सहयोग का प्रस्ताव रखा है। यह संदेश साफ संकेत है कि अब सत्ता को भी स्वीकार करना पड़ रहा है कि नीति नहीं, नीयत बदलाव लाती है।

कुटरा अब सवाल है, जवाब भी:

कुटरा आज सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि व्यवस्था से सवाल पूछती मिसाल है—

जब सरकारें चुप थीं, तब समाज आगे क्यों आया?

और अब जब बदलाव दिख रहा है, तो सत्ता कितनी ईमानदारी से साथ देगी?

कुटरा की कहानी सत्ता के लिए चेतावनी भी है और अवसर भी—

या तो ऐसे जननायकों का साथ दो, या इतिहास खुद तुम्हें कटघरे में खड़ा करेगा।

 

 

शुभम् मरकाम 

मितान भूमि समाचार

9111749055

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