अन्तर्राष्ट्रीय

सीरिया और इराक में ईरान से जुड़े 85 से अधिक ठिकानों को बनाया निशाना

नई दिल्ली:  अमेरिका ने इराक और सीरिया में ईरानी पोस्टों पर दर्जनों हवाई हमले किए, जिसमें कई लोगों की मौत की जानकारी सामने आ रही है. हालांकि अमेरिका और ईरान ने मौत के आंकड़ों पर अब तक कोई भी जानकारी शेयर नहीं की है. पिछले हफ्ते जॉर्डन में किए गए ड्रोन हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद अमेरिका ने ये जवाबी कार्रवाई की है. अमेरिका ने हमलों को लेकर पहले ही चेतावनी जारी की थी, हालांकि हमले कब और कहां होंगे, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी. अब अमेरिका ने  इराक और सीरिया में ईरान समर्थित मिलिशिया और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले दर्जनों पोस्टों को निशाना बनाया है. इन हमलों में कई लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है.

ईरान को अमेरिका का करारा जवाब

पिछले रविवार को जॉर्डन में किए गए ड्रोन हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद वाशिंगटन ने ईरानी सैनिकों को दोषी ठहराते हुए बड़े स्तर पर हवाई हमलों का आदेश दिया था. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक बयान में कहा, “हमारी प्रतिक्रिया आज शुरू हुई, टाइम और जगह हम चुनेंगे.” उन्होंने आगे कहा कि, “अमेरिका मिडल ईस्ट या फिर दुनिया में कहीं भी संघर्ष नहीं चाहता, लेकिन जो लोग हमें नुकसान पहुंचाना चाहते हैं उन्हें यह जानना जरूरी है कि अगर आप किसी अमेरिकी को नुकसान पहुंचाते हैं, तो हम जवाब देंगे.”

ईरान समर्थित 85 से ज्यादा लक्ष्यों को बनाया निशाना

वाशिंगटन और तेहरान दोनों ने ही पूर्ण युद्ध से बचने की कोशिश की है. अमेरिका ईरान के साथ सीधे संघर्ष से बचते हुए आगे के हमलों को रोकने की इच्छा रखता है. अमेरिका के शुरुआती हमलों में से कोई भी हमला ईरानी क्षेत्र पर नहीं किया गया. यूएस सेंट्रल कमांड ( CENTCOM) ने एक बयान में कहा कि हमलों में सिर्फ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कुद्स फोर्स के साथ ही इससे संबंधित मिलिशिया समूहों को निशाना बनाया गया. अमेरिकी सेना ने अपने बम बरसाने वाले विमानों से 85 से ज्यादा लक्ष्यों को निशाना बनाया.

इराक-सीरिया में 85 जगहों पर हमला

US सेंट्रल कमांड ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “2 फरवरी को शाम 4 बजे यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) बलों ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) कुद्स फोर्स और उससे संबंधित मिलिशिया समूहों के खिलाफ इराक और सीरिया में हवाई हमले किए. अमेरिकी सैन्य बलों ने बम बरसाने वाले विमानों से 85 से ज्यादा लक्ष्यों को निशाना बनाया. हवाई हमलों में 125 से ज्यादा सटीक युद्ध सामग्री का उपयोग किया गया. जिन पर हमला किया गया उनमें मिलिशिया समूहों और ईरानी बलों से जुड़ी कमांड एंड कंट्रोल और इंटेलिजेंस सेंटरों के साथ ही रॉकेट, मिसाइल, ड्रोन स्टोरेज फेसिलिटीज शामिल थीं, जिन्होंने अमेरिका के खिलाफ हमलों में मदद की थी.”

अमेरिका ने लिया 3 सैनिकों की मौत का बदला

सेंटकॉम के मुताबिक, “हवाई हमलों में 125 से ज्यादा सटीक युद्ध सामग्री का इस्तेमाल किया गया,” जिन जगहों को निशाना बनाया गया, उनमें  मिलिशिया समूहों और ईरानी बलों से जुड़ी कमांड एंड कंट्रोल और इंटेलिजेंस सेंटरों के साथ ही रॉकेट, मिसाइल, ड्रोन स्टोरेज फेसिलिटीज शामिल थीं, जिन्होंने अमेरिका के खिलाफ हमलों में मदद की थी. सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स युद्ध मॉनिटर ने बताया कि पूर्वी सीरिया में हुए हमलों में करीब 18 ईरान समर्थक लड़ाके मारे गए.

ईरान समर्थक गुटों की 26 जगहें नष्ट

मॉनिटरिंग ग्रुप ने न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया कि अल्बु कमाल, इराकी बॉर्डर के पास दीर एज़ोर शहर से 100 किमी से ज्यादा दूरी तक फैले पूर्वी सीरिया के एक बड़े हिस्से पर चल रही कार्रवाई में हथियार डिपो समेत ईरान समर्थक समूहों की करीब 26 अहम जगहों को नष्ट कर दिया गया है.

बाइडेन ने पहले ही दी थी हमले की चेतावनी

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जॉर्डन में हुए ड्रोन हमले में तीन सैनिकों की मौत के बाद उकी श्रद्धांजलि सभा में जिम्मेदारों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की कसम खाई थी. अब अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरानी पोस्टों को निशाना बनाया है.

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