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बुंदेलखंड में दौड़ी साइकिल : भाजपा के अभेद दुर्ग पर सपा का कब्जा…

लखनऊ । भाजपा के अभेद दुर्ग बुंदेलखंड पर सपा ने कब्जा जमा लिया है। यहां की चार सीटों में तीन पर सपा ने कब्जा जमा लिया है। भाजपा सिर्फ झांसी सीट बचा पाई। कहीं हाथी की चाल तो कहीं सोशल इंजीनियरिंग के तहत हुई जातीय गोलबंदी ने साइकिल की राह आसान की। यहां सपा को 10 साल बाद जीत मिली है। भाजपा ने बुंदेलखंड की चारों सीटों पर निवर्तमान सांसदों पर दांव लगाया था।

बांदा-
यहां ब्राह्मणों की नाराजगी भाजपा पर भारी पड़ी। भाजपा सांसद आरके पटेल करीब 71 हजार वोट से सपा की कृष्णा पटेल से हार गए। कृष्णा को करीब 39 फीसदी और आरके पटेल को करीब 32.12 फीसदी वोट मिला।

बसपा के मयंक द्विवेदी करीब 23.53 फीसदी वोट हासिल किए। यहां भाजपा से नाराज ब्राह्मणों ने बसपा की ओर कदम बढ़ा दिया, जो हार की वजह बना। वर्ष 2019 में भाजपा को 46.18 फीसदी और सपा-बसपा को 40.49, कांग्रेस को 7.29 फीसदी वोट मिला था।

जालौन-
केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री भानु प्रताप सिंह वर्मा करीब 53 हजार वोट से सपा के नारायण दास अहिरवार से हार गए हैं। वर्मा को करीब 42.19 फीसदी और अहिरवार करीब 46.96 फीसदी वोट मिला। वर्ष 2019 में भाजपा को 51.45 फीसदी, बसपा को 37.44 और कांग्रेस को 7.92 फीसदी वोट मिला था। ऐन मौके पर पाला बदल कर भाजपा में जाने वाले सपा के कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी भी कोई करिश्मा नहीं दिखा पाए।

हमीरपुर-
दो बार से लगातार सांसद रहे पुष्पेंद्र सिंह चंदेल करीब 2630 वोट से चुनाव हार गए। यहां सपा के अजेंद्र सिंह लोधी को 44 फीसदी और भाजपा को 43.76 फीसदी वोट मिला। वर्ष 2019 में भाजपा को 52.77 बसपा को 29.95 और कांग्रेस को 10.51 फीसदी वोट मिला था। यहां लोधी वोटबैंक हमेशा भाजपा के साथ रहा है, लेकिन इस बार यह सपा के पक्ष में गोलबंद हुआ, जो भाजपा की हार का का कारण बना।

झांसी-

यहां भाजपा के निवर्तमान सांसद अनुराग शर्मा करीब करीब एक लाख से अधिक वोट से चुनाव जीते हैं। उन्हें करीब 50 फीसदी वोट मिला है, जबकि कांग्रेस के प्रदीप जैन को करीब 42 फीसदी और बसपा के रवि प्रकाश को 4.58 फीसदी वोट मिला। यहां दलित वोट भाजपा से छिटक कर कांग्रेस के खेमे में चला गया है, जिससे भाजपा के वोटबैंक में गिरावट आई है। वर्ष 2019 में भाजपा को 58.61 और सपा-बसपा को 32.12 और कांग्रेस को 6.24 फीसदी वोट मिला था।

बुंदेलखंड अभावग्रस्त इलाका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यहां के लोगों ने बड़ा सपना देखा, जो तत्कालीक तौर पर पूरा नहीं हो पाया। सड़कें तो बनीं, लेकिन पेयजल और रोजगार, स्वास्थ्य की दिशा में जितनी काम होना चाहिए, वह नहीं हो पाया है। दूसरी तरफ संविधान बचाने और जातीय गोलबंदी का मुद्दा भी तेजी से उछला। यही वजह है कि भाजपा के वोटबैंक में बिखराव हुआ।

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