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BMC चुनाव में रिकॉर्ड जीत के बावजूद भाजपा ‘नाखुश’, मगर क्यों? मंथन शुरू

रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी नेताओं ने मुंबई इकाई में समन्वय की कमी, उम्मीदवार चयन में खामी और राज-उद्धव ठाकरे की ओर से उठाए गए ‘मराठी अस्मिता और मुंबई गौरव’ के मुद्दे का प्रभावी ढंग से मुकाबला न कर पाने को मुख्य कारण बताया।

बीएमसी चुनाव में रिकॉर्ड 89 सीटें जीतने के बावजूद भाजपा नतीजे से उतनी खुश नहीं है, जो कि 2002 के बाद किसी भी पार्टी की ओर से अकेले हासिल की गई सबसे ज्यादा संख्या है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने इसे उम्मीदों से कम बताया है। बीजेपी ने कम से कम 110 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था ताकि वह बहुमत के आधे निशान के करीब पहुंच सके, लेकिन वह इससे काफी पीछे रह गई। चुनावी कैंपेन में क्या गलत हुआ? इसकी आंतरिक समीक्षा शुरू हो गई है। पार्टी नेताओं ने मुंबई इकाई में समन्वय की कमी, उम्मीदवार चयन में खामी और राज-उद्धव ठाकरे की ओर से उठाए गए ‘मराठी अस्मिता और मुंबई गौरव’ के मुद्दे का प्रभावी ढंग से मुकाबला न कर पाने को मुख्य कारण बताया। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ सीट-बंटवारे की बातचीत से पहले, भाजपा ने 155 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बनाई थी और लगभग 120-125 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था। लेकिन पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप से शिंदे ने कड़ी मोलभाव की और अपनी पार्टी के लिए 91 सीटें हासिल कीं, जिससे भाजपा को 137 सीटें मिलीं। कम सीटों के बंटवारे के कारण भाजपा ने अपना टारगेट 110 सीटों तक घटा दिया, लेकिन वह केवल 89 सीटें ही जीत पाई। एक भाजपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘पार्टी ने अन्य पार्टियों से 11 मौजूदा पार्षदों को शामिल किया था, जिससे चुनाव से पहले मौजूदा पार्षदों की संख्या 93 हो गई थी। हम उस संख्या को भी बरकरार नहीं रख पाए।’

सीएम फडणवीस का क्या कहना है?

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कथित तौर पर मुंबई इकाई को पार्टी की इस असफलता पर नाराजगी जताई है कि उसने अपनी गति को बड़ी जीत में नहीं बदल पाया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, राज्य नेतृत्व का मानना है कि रविवार को शिवाजी पार्क में राज और उद्धव ठाकरे की संयुक्त रैली ने मराठी मतदाताओं से मुंबई और मराठी पहचान बचाओ की अपील की, जिसका असर पड़ा। एक अन्य भाजपा नेता ने कहा, ‘राज ठाकरे की ओर से पिछले एक दशक में अडानी ग्रुप की वृद्धि पर प्रस्तुति प्रभावी थी। उसने लोगों को प्रभावित किया, लेकिन हम इसका मजबूत जवाब नहीं दे पाए। नेतृत्व ने इस नैरेटिव को बनते देखा था लेकिन उसे बेअसर करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। सोमवार को शिवाजी पार्क रैली में भीड़ जुटाने में असफलता ने महायुति को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया।’

कट्टर मराठी मतदाताओं को लुभाने में पीछे

भाजपा ने 29 नगर निगमों में कुल सीटों का 49% जीता और मुंबई में 64% से ज्यादा स्ट्राइक रेट हासिल किया, लेकिन नेताओं ने माना कि देश के सबसे अमीर नगर निगम में उम्मीदें बहुत ज्यादा थीं। पार्टी का मानना है कि मराठी मतदाताओं में तेज बदलाव निर्णायक साबित हुआ। एक भाजपा नेता ने कहा, ‘हमारा उत्तर भारतीय और गुजराती बोलने वाला वोट बैंक मजबूत रहा, लेकिन विधानसभा चुनाव में हमारे साथ आए कट्टर मराठी मतदाता अब ठाकरे भाइयों की ओर चले गए। यह बदलाव इतना तेज था कि शिंदे की शिवसेना भी इसे रोक नहीं पाई। फडणवीस और शिंदे ने सोमवार की रैली में इस नैरेटिव को कम करने की कोशिश की, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी।’

शिंदे की शिवसेना कहां कमजोर रही

भाजपा के राज्य नेतृत्व ने गठबंधन सहयोगियों के बीच कमजोर समन्वय को भी निशाना बनाया। एक शिवसेना नेता ने कहा, ‘टिकट बंटवारे की मेज पर हुई तकरार जमीन पर भी दिखी। टिकट न मिलने वाले आकांक्षियों को मनाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी, जिससे दोनों तरफ नुकसान कम हो सकता था।’ हालांकि, फडणवीस ने सार्वजनिक रूप से महायुति के मुंबई प्रदर्शन का बचाव किया और कहा कि गठबंधन ने आसानी से 100 का आंकड़ा पार कर लिया। उन्होंने कहा, ‘हमने 119 सीटें जीती हैं और कम से कम 14 सीटें मात्र 7 से 100 वोटों के अंतर से हारी हैं। पिछले तीन चुनावों में शिवसेना कुल मिलाकर इतनी संख्या नहीं पहुंच पाई थी।’ शिवसेना के कमजोर प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मुंबई में विभाजन के बाद शिंदे की पार्टी का पहला नागरिक चुनाव था। उन्होंने राज ठाकरे और मनसे को सबसे बड़ा हारा हुआ बताया और कहा कि गठबंधन से मुख्य लाभ उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को हुआ।

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