
बिहार चुनाव में कांग्रेस पार्टी जी तोड़ मेहनत करने के मूड में है। वोटर अधिकार यात्रा के बाद एक्टिव हुए कांग्रेसी नेताओं में एक बार फिर जोश भरने की तैयारी हो रही है। दरअसल इस बार कांग्रेस वर्किंग कमिटी की मीटिंग बिहार में ही किया जाना तय किया गया है।
इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, सभी मौजूदा और पूर्व मुख्यमंत्री, व कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। इसे महज संगठनात्मक बैठक न मानकर कांग्रेस के एक बड़े राजनीतिक दांव के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस ने पटना को बैठक का स्थान चुनकर स्पष्ट संकेत देने की कोशिश की है कि पार्टी बिहार को लेकर गंभीर है। राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश देखा गया और जनता में भी पार्टी को लेकर उत्सुकता बढ़ी। अब पार्टी इस माहौल को भुनाने की कोशिश में है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बैठक कांग्रेस का सिर्फ आंतरिक आयोजन नहीं, बल्कि एक तरह का सार्वजनिक शक्ति प्रदर्शन भी है। इसका मकसद न केवल बीजेपी को चुनौती देना है, बल्कि महागठबंधन के भीतर कांग्रेस की अहमियत को भी रेखांकित करना है। पार्टी दिखाना चाहती है कि भले ही बिहार में उसका जनाधार कमजोर हो, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर वह अभी भी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है।












