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कमिश्नरेट में भी गुंडागर्दी का ‘खुला खेल’! खुशहालपुर सर्विस रोड पर टाटा एस चालक की बेरहमी से पिटाई

क्राईम न्यूज़ October 21, 2026 • रिपोर्टर: Shubham Markam
कमिश्नरेट में भी गुंडागर्दी का ‘खुला खेल’! खुशहालपुर सर्विस रोड पर टाटा एस चालक की बेरहमी से पिटाई

कमिश्नरेट में भी गुंडागर्दी का ‘खुला खेल’! खुशहालपुर सर्विस रोड पर टाटा एस चालक की बेरहमी से पिटाई

  • चलती गाड़ी का दरवाजा खोलकर बरसाईं लातें, तमाशबीन बने रहे लोग; आखिर अपराधियों में कानून का खौफ कहां?

रायपुर। राजधानी रायपुर के खुशहालपुर सर्विस रोड के पास मारपीट की एक घटना ने कानून-व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, एक टाटा एस वाहन के चालक के साथ कथित तौर पर एक कार सवार ने बेरहमी से मारपीट की। आरोप है कि पहले चालक को लात-घूंसों से पीटा गया और जब इससे भी मन नहीं भरा, तो चलती गाड़ी का दरवाजा खोलकर फिल्मी अंदाज में चालक पर लातों की बरसात की गई।

हैरानी की बात यह है कि घटना के दौरान आसपास मौजूद लोग कथित तौर पर तमाशबीन बने रहे और चालक की मदद के लिए कोई आगे नहीं आया। एक व्यक्ति सड़क पर सरेआम मार खाता रहा और लोग देखते रहे। आखिर समाज में ऐसी संवेदनहीनता क्यों बढ़ रही है?

कमिश्नरेट प्रणाली लागू, फिर भी दबंगई के हौसले बुलंद?

राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बावजूद यदि सड़क पर इस तरह मारपीट की घटनाएं सामने आती हैं, तो स्वाभाविक रूप से पुलिस की प्रभावी मौजूदगी और अपराधियों में कानून के खौफ को लेकर सवाल उठेंगे। क्या कुछ लोगों को कानून का डर नहीं रहा, या फिर उन्हें लगता है कि सड़क पर किसी को भी पीटकर आसानी से निकल सकते हैं?

सवाल यह भी है कि आखिर एक वाहन चालक की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? सड़क पर विवाद होने का मतलब क्या किसी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार मिल जाता है? यदि किसी को शिकायत या आपत्ति है, तो उसके लिए पुलिस और कानून का रास्ता है, न कि लात-घूंसों से फैसला सुनाने का।

गुंडागर्दी का जवाब कानून से मिलना चाहिए। पुलिस प्रशासन को इस घटना का संज्ञान लेकर मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कर संबंधित व्यक्ति की पहचान की जाए और आरोपों की पुष्टि होने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।

राजधानी की सड़कों पर आम नागरिक सुरक्षित महसूस करें, यह पुलिस प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अब देखना होगा कि इस घटना पर पुलिस क्या कार्रवाई करती है और सरेआम मारपीट करने वालों को कानून के दायरे में लाया जाता है या नहीं।

क्योंकि सवाल सिर्फ एक टाटा एस चालक की पिटाई का नहीं, बल्कि राजधानी की सड़कों पर आम आदमी की सुरक्षा और कानून के सम्मान का है।

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