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Trump Tariff News: भारत और चीन को राहत, रूस से तेल खरीदने पर टैरिफ लगाने के फैसले में बदलाव

इंडिया October 17, 2026 • रिपोर्टर: Shubham Markam
Trump Tariff News: भारत और चीन को राहत, रूस से तेल खरीदने पर टैरिफ लगाने के फैसले में बदलाव

Trump Tariff News: भारत और चीन को राहत, रूस से तेल खरीदने पर टैरिफ लगाने के फैसले में बदलाव

Trump Russia Oil Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने के मामले में फिलहाल राहत दी है। इस फैसले से भारत और चीन जैसे देशों को तत्काल नए शुल्क के खतरे से राहत मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, अमेरिका की ओर से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर निगरानी जारी रहेगी। ऐसे में ट्रंप के इस कदम को भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों के प्रावधानों को लागू करने के साथ ही प्रस्तावित टैरिफ और कुछ प्रतिबंधात्मक उपायों पर छूट भी दी है। इससे अमेरिकी प्रशासन के रुख को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस राहत को स्थायी फैसला मानना अभी जल्दबाजी होगी।

रूस से तेल खरीदने वाले देशों को क्यों मिली राहत?

रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की योजना का उद्देश्य रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ाना है। अमेरिका चाहता है कि रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद उसके तेल कारोबार को जारी रखने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बनाया जाए।

हालांकि, ट्रंप के हालिया आदेश में प्रस्तावित शुल्कों और कई प्रतिबंधों पर फिलहाल छूट दिए जाने की जानकारी सामने आई है। आदेश में भारत या चीन का नाम लेकर अलग से राहत देने की बात नहीं बताई गई है, लेकिन इससे इन देशों पर तत्काल अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने का खतरा टलता नजर आ रहा है।

क्या है ग्राहम एक्ट और कितना लग सकता है टैरिफ?

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई को लेकर अमेरिकी कानून और प्रतिबंधों से जुड़े प्रावधान चर्चा में हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाने का विकल्प शामिल है।

कुछ प्रावधानों के तहत रूस के प्रतिबंधित ऊर्जा कारोबार को मदद पहुंचाने वाले देशों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। रूस से आने वाले सामान पर शुल्क को 500 प्रतिशत तक बढ़ाने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, ऐसे प्रावधानों का वास्तविक इस्तेमाल अमेरिकी प्रशासन के फैसलों और लागू कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

टैरिफ पर राहत, लेकिन अमेरिका की निगरानी जारी

ट्रंप के फैसले से फिलहाल अतिरिक्त शुल्क के खतरे में कमी आई है, लेकिन रूस से तेल खरीदने वाले देशों को लेकर अमेरिकी नीति में अनिश्चितता बनी हुई है।

अमेरिकी प्रशासन संबंधित विभागों के साथ मिलकर यह निगरानी कर सकता है कि कौन से देश रूस से तेल और गैस खरीद रहे हैं और क्या वे प्रतिबंधों से बचने में रूस की मदद कर रहे हैं। भविष्य में परिस्थितियों के आधार पर नए प्रतिबंधों या शुल्कों पर फैसला लिया जा सकता है।

इसलिए भारत को मिली मौजूदा राहत को स्थायी छूट मानने के बजाय अमेरिका की आगे की नीतियों पर नजर रखना जरूरी होगा।

भारत को पहले भी मिल चुकी है टैरिफ में राहत

भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में शामिल है। ऐसे में अमेरिका की रूस संबंधी प्रतिबंध नीति का असर भारतीय ऊर्जा आयात और व्यापार पर पड़ सकता है।

उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने इससे पहले भारत पर रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क हटाया था। इसके अलावा भारतीय सामान पर अमेरिकी पारस्परिक टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने की भी जानकारी दी गई थी।

इन फैसलों के बाद भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में सुधार की उम्मीद बढ़ी थी। हालांकि, भविष्य में शुल्कों को लेकर किसी भी बदलाव का असर भारतीय निर्यातकों, कारोबारियों और ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ सकता है।

अमेरिकी सांसदों ने प्रतिबंधों को पूरी तरह लागू करने की मांग की थी

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के आदेश से पहले अमेरिकी सांसदों ने रूस से जुड़े प्रतिबंधों को पूरी तरह लागू करने की मांग उठाई थी। उनका तर्क था कि रूस को आर्थिक मदद पहुंचाने वाले देशों को दी जाने वाली किसी भी छूट की समयसीमा सीमित होनी चाहिए और उसे ठोस शर्तों से जोड़ा जाना चाहिए।

हालांकि, ट्रंप के हालिया फैसले में छूट की निश्चित समयसीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं बताई गई है। इससे आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रशासन के अगले कदम महत्वपूर्ण हो जाएंगे।

मार्को रुबियो के भारत दौरे पर क्यों रहेंगी नजरें?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के प्रस्तावित दौरे को भी भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार, रुबियो 17 से 22 अक्टूबर के बीच समरकंद, मुंबई और जामनगर का दौरा करेंगे। मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उनकी बैठक प्रस्तावित बताई गई है।

रूस से तेल की खरीद, ऊर्जा सहयोग, व्यापार शुल्क और द्विपक्षीय संबंधों जैसे मुद्दे इस कूटनीतिक बातचीत के केंद्र में रह सकते हैं। हालांकि, किसी खास मुद्दे पर अंतिम निर्णय या समझौते की पुष्टि संबंधित आधिकारिक जानकारी से ही होगी।

क्या भारत पर भविष्य में फिर लग सकता है 100 प्रतिशत टैरिफ?

फिलहाल सामने आई जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ पर राहत दी गई है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भविष्य में अमेरिका भारत या अन्य देशों पर कोई शुल्क नहीं लगा सकता।

अमेरिकी प्रशासन रूस से तेल खरीदने वाले देशों की गतिविधियों पर नजर रख सकता है और जरूरत पड़ने पर नए कदम उठा सकता है। ऐसे में भारत के लिए ऊर्जा जरूरतों, व्यापारिक हितों और अमेरिका के साथ कूटनीतिक संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखना अहम होगा।

कुल मिलाकर, ट्रंप के फैसले से भारत को तत्काल अतिरिक्त टैरिफ के खतरे से राहत मिलने के संकेत हैं। हालांकि, आगे की स्थिति अमेरिकी प्रशासन की नीतियों, रूस से जुड़े प्रतिबंधों और भारत-अमेरिका के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी।

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