संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान पर करारा प्रहार: “अल्पसंख्यकों पर जुल्म ढाने वाला देश न दे नैतिकता का उपदेश”
संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान पर करारा प्रहार: “अल्पसंख्यकों पर जुल्म ढाने वाला देश न दे नैतिकता का उपदेश”
न्यूज डेस्क: संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच पर भारत ने एक बार फिर आतंकवाद, अल्पसंख्यकों के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे वैश्विक मुद्दों पर पाकिस्तान के दोहरे मापदंड को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। भारतीय कूटनीतिज्ञों ने ठोस तथ्यों और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के पास भारत के आंतरिक मामलों या जम्मू-कश्मीर पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
1. कारगिल का इतिहास याद दिलाकर किया निरुत्तर
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने पाकिस्तान की बयानबाजी पर कड़ा पलटवार करते हुए कहा:
“यह बेहद हास्यास्पद है कि जो देश 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान मारे गए अपने ही सैनिकों के शवों को स्वीकार करने से मुकर गया था, वह आज धार्मिक स्वतंत्रता और अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर ज्ञान दे रहा है।”
उन्होंने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए याद दिलाया कि भारतीय सेना ने ही पूरी इंसानियत और इस्लामी रीति-रिवाजों के साथ उन पाकिस्तानी सैनिकों का अंतिम संस्कार कर उन्हें सैन्य सम्मान दिया था।
2. ‘पीओके और अपने अल्पसंख्यकों की चिंता करे पाकिस्तान’
भाविका मंगलानंदन ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय अपने अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की बदतर स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
- घटती अल्पसंख्यक आबादी: पाकिस्तान में हिंदू, सिख और ईसाइयों जैसे अल्पसंख्यकों की संख्या लगातार गिर रही है और उनके मानवाधिकारों का हनन आम बात हो चुकी है।
- नैतिकता का अभाव: जो देश अपने नागरिकों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करने में पूरी तरह विफल रहा है, उसे भारत को उपदेश देने का कोई हक नहीं है।
3. दाऊद इब्राहिम और आतंकवाद पर बेनकाब
यूएन में भारत के एक अन्य प्रथम सचिव रघु पुरी ने सीमा पार आतंकवाद को सरकारी नीति के रूप में इस्तेमाल करने पर पाकिस्तान को घेरा।
- दाऊद और लादेन का कनेक्शन: रघु पुरी ने ध्यान दिलाया कि दाऊद इब्राहिम 2003 में ही यूएन की वैश्विक आतंकवादी सूची में दर्ज हो चुका था। वह उसी देश (पाकिस्तान) में शरण लिए हुए है, जहाँ अल-कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन छिपा था और मारा गया था।
- विफल राष्ट्र: भारत ने पाकिस्तान को एक ऐसा “विफल राज्य” करार दिया, जो आम नागरिकों की हत्याओं और आतंकवाद को प्रोत्साहन देने को अपनी नीति मानता है।
4. यूएन रिपोर्ट के पक्षपात पर उठाए सवाल
भारतीय प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र की विशेष रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए:
- विकसित देशों का दोहरा मापदंड: कोविड-19 महामारी के दौरान मानवाधिकारों और भेदभाव के मुद्दों पर सिर्फ विकासशील देशों को निशाना बनाने की प्रवृत्ति की आलोचना की गई। विकसित देशों में हुई दुखद घटनाओं को रिपोर्ट से बाहर रखने पर भारत ने जवाबदेही की मांग की।
- आतंकवादियों के मानवाधिकार बनाम पीड़ितों के अधिकार: भारत ने चिंता जताई कि वैश्विक मंचों पर अक्सर आतंकवादियों के मानवाधिकारों की वकालत की जाती है, जबकि उनके द्वारा मारे गए निर्दोष पीड़ितों के अधिकारों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
मुख्य बिंदु (Quick Summary)
- कारगिल की सच्चाई: अपने सैनिकों के शव न लेने वाले पाकिस्तान को भारत ने याद दिलाई मर्यादा।
- जम्मू-कश्मीर पर दो टूक: पीओके पर ध्यान दे पाकिस्तान, भारत के आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं।
- आतंकवाद पर घेरना: दाऊद इब्राहिम और ओसामा बिन लादेन का जिक्र कर पाक की आतंकी परस्त नीति उजागर।