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युद्ध, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन पर ओम बिरला का जोर, बोले- मिलकर निकालना होगा समाधान

इंडिया October 27, 2026 • रिपोर्टर: Shubham Markam
युद्ध, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन पर ओम बिरला का जोर, बोले- मिलकर निकालना होगा समाधान

युद्ध, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन पर ओम बिरला का जोर, बोले- मिलकर निकालना होगा समाधान

नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 में सदस्य देशों से वैश्विक शांति, जन-केंद्रित विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की वास्तविक सफलता केवल बैठकों और चर्चाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इनसे ऐसे ठोस परिणाम निकलने चाहिए, जिनका लाभ आम लोगों तक पहुंचे।

नई दिल्ली में आयोजित इस दो दिवसीय मंच पर बिरला ने सदस्य देशों की संसदों से साझा प्रतिबद्धताओं को प्रभावी नीतियों में बदलने और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करने का आह्वान किया।

वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए संवाद जरूरी

ओम बिरला ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया क्षेत्रीय संघर्षों, युद्ध, आर्थिक अस्थिरता, व्यापारिक तनाव, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं का समाधान संवाद, कूटनीति, आपसी विश्वास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए ही खोजा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों की संसदें कानून निर्माण, बजट निर्धारण, नीतियों पर चर्चा और उनके क्रियान्वयन की निगरानी के माध्यम से साझा लक्ष्यों को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

ग्लोबल साउथ की आवाज को मिले मजबूती

लोकसभा अध्यक्ष ने ब्रिक्स को ग्लोबल साउथ के देशों की आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों को साझा हितों और उद्देश्यों को व्यावहारिक सहयोग तथा प्रभावी नीतियों में बदलने की दिशा में काम करना चाहिए।

इस वर्ष संसदीय मंच का विषय ‘जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना’ है। बैठक में विकास, नवाचार, सहयोग, लचीलापन और सततता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

युवाओं और सतत विकास पर विशेष जोर

ओम बिरला ने कहा कि विकास की नीतियां बनाते समय पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है। विकास और पर्यावरणीय संतुलन को एक-दूसरे का पूरक बनाकर ही दीर्घकालिक प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है।

उन्होंने युवाओं की आकांक्षाओं को समझने, उनकी प्रतिभा को अवसर देने और उन्हें राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, युवाओं को विकास की मुख्यधारा में शामिल करना समावेशी समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है।

साझा प्रतिबद्धताओं को जमीन पर उतारने की जरूरत

बिरला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ब्रिक्स को ‘समाधानों का इकोसिस्टम’ बनाने के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि सदस्य देशों को आपसी बातचीत को ठोस सहयोग और साझा समझ को विश्वास में बदलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संसदें अपने विधायी और निगरानी संबंधी दायित्वों के माध्यम से इन लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ब्रिक्स संसदीय मंच अधिक समावेशी, शांतिपूर्ण और टिकाऊ विश्व व्यवस्था के निर्माण की दिशा में सार्थक भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने भी अपने विचार रखे, जबकि लोकसभा के महासचिव ने स्वागत भाषण दिया।

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