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Happy Birthday Anil Kumble: टूटे जबड़े के बावजूद नहीं मानी हार, जानें ‘जंबो’ के करियर की अनसुनी कहानी

इंडिया October 17, 2026 • रिपोर्टर: Shubham Markam
Happy Birthday Anil Kumble: टूटे जबड़े के बावजूद नहीं मानी हार, जानें ‘जंबो’ के करियर की अनसुनी कहानी

Happy Birthday Anil Kumble: टूटे जबड़े के बावजूद नहीं मानी हार, जानें ‘जंबो’ के करियर की अनसुनी कहानी

Anil Kumble 56th Birthday: भारतीय क्रिकेट के महानतम गेंदबाजों में शुमार अनिल कुंबले अपनी सटीक गेंदबाजी, दमदार प्रदर्शन और मैदान पर कभी हार न मानने वाले जज्बे के लिए जाने जाते हैं। टेस्ट क्रिकेट की एक पारी में सभी 10 विकेट लेने का ऐतिहासिक कारनामा हो या टूटे जबड़े के बावजूद मैदान पर उतरकर गेंदबाजी करना, कुंबले ने कई ऐसे पल दिए जिन्हें क्रिकेट प्रेमी आज भी याद करते हैं।

‘जंबो’ के नाम से मशहूर हैं अनिल कुंबले

अनिल कुंबले का जन्म 17 अक्टूबर 1970 को कर्नाटक के बेंगलुरु में हुआ था। बचपन से ही क्रिकेट में रुचि रखने वाले कुंबले ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर भारतीय टीम में खास पहचान बनाई। उन्होंने 1990 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया और करीब 18 वर्षों तक देश का प्रतिनिधित्व किया।

कुंबले की गेंदबाजी की सबसे बड़ी खासियत उनकी सटीक लाइन-लेंथ, गति और उछाल थी। दूसरे स्पिनरों की तरह गेंद को बहुत ज्यादा टर्न कराने के बजाय वह अपनी निरंतरता और रणनीति से बल्लेबाजों को परेशान करते थे। उनकी तेज गेंदबाजी शैली के कारण उन्हें ‘जंबो’ उपनाम मिला।

जब एक पारी में सभी 10 विकेट लेकर रचा इतिहास

अनिल कुंबले के करियर का सबसे यादगार पल 1999 में आया, जब दिल्ली के फिरोज शाह कोटला मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच की एक पारी में उन्होंने सभी 10 विकेट हासिल किए। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ वह टेस्ट क्रिकेट में एक पारी के सभी 10 विकेट लेने वाले दुनिया के दूसरे गेंदबाज बने। उनसे पहले इंग्लैंड के जिम लेकर यह कारनामा कर चुके थे।

कुंबले का यह रिकॉर्ड भारतीय क्रिकेट के सबसे यादगार पलों में गिना जाता है। उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें विश्व क्रिकेट के महान गेंदबाजों की सूची में एक खास स्थान दिलाया।

टेस्ट क्रिकेट में 619 विकेट का शानदार रिकॉर्ड

अनिल कुंबले ने अपने टेस्ट करियर में 132 मुकाबले खेले और 619 विकेट अपने नाम किए। वह लंबे समय तक टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों में शामिल रहे। वनडे क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा और उन्होंने भारतीय टीम के लिए कई अहम मौकों पर विकेट चटकाए।

1996 का वनडे विश्व कप भी कुंबले के लिए यादगार रहा। उन्होंने टूर्नामेंट में सात मैचों में 15 विकेट हासिल किए और अपनी गेंदबाजी से भारतीय टीम के प्रदर्शन में अहम योगदान दिया।

गेंदबाज ही नहीं, उपयोगी बल्लेबाज भी थे कुंबले

कुंबले को उनकी गेंदबाजी के लिए ज्यादा पहचान मिली, लेकिन वह निचले क्रम में बल्लेबाजी करने की क्षमता भी रखते थे। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 2,506 रन बनाए। साल 2007 में इंग्लैंड के खिलाफ ओवल टेस्ट में उन्होंने 110 रन की शानदार पारी खेलकर अपने करियर का एकमात्र टेस्ट शतक लगाया।

यह पारी उनके करियर की खास उपलब्धियों में शामिल है, क्योंकि उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में टीम के लिए अहम योगदान दिया।

टूटे जबड़े के बावजूद मैदान पर उतरे

अनिल कुंबले के करियर का एक और प्रेरणादायक पल साल 2002 में वेस्टइंडीज के खिलाफ एंटीगा टेस्ट के दौरान देखने को मिला। मैच में उनका जबड़ा चोटिल हो गया था, लेकिन इसके बावजूद वह पट्टी बांधकर मैदान पर उतरे और गेंदबाजी की। इस दौरान उन्होंने वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज ब्रायन लारा का विकेट हासिल किया।

उनका यह साहस और टीम के प्रति समर्पण क्रिकेट इतिहास के यादगार लम्हों में गिना जाता है।

भारतीय टीम की कप्तानी और कोचिंग की जिम्मेदारी

अनिल कुंबले ने खिलाड़ी के रूप में ही नहीं, बल्कि कप्तान और कोच के तौर पर भी भारतीय क्रिकेट में योगदान दिया। उन्होंने 2007 से 2008 के बीच भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी की। उनके नेतृत्व में टीम ने कई महत्वपूर्ण मुकाबले खेले।

नवंबर 2008 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी कुंबले खेल से जुड़े रहे। साल 2016 में उन्हें भारतीय टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया। इसके अलावा उन्होंने आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, मुंबई इंडियंस और पंजाब किंग्स जैसी टीमों के साथ कोचिंग और अन्य महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।

पद्म श्री और आईसीसी हॉल ऑफ फेम से सम्मानित

क्रिकेट में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए अनिल कुंबले को कई सम्मान मिले। साल 2005 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें 2015 में आईसीसी क्रिकेट हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया। उन्होंने आईसीसी क्रिकेट समिति के अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।

अनिल कुंबले का करियर इस बात की मिसाल है कि अनुशासन, मेहनत और दृढ़ संकल्प से विश्व क्रिकेट में खास मुकाम हासिल किया जा सकता है। अपनी ऐतिहासिक उपलब्धियों और शानदार खेल भावना के कारण वह आज भी भारतीय क्रिकेट के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में गिने जाते हैं।

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