वीटो शक्ति पर भारत की दोटूक, वैश्विक शांति से ऊपर नहीं होने चाहिए राजनीतिक हित
वीटो शक्ति पर भारत की दोटूक, वैश्विक शांति से ऊपर नहीं होने चाहिए राजनीतिक हित
नई दिल्ली: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की मांग दोहराते हुए वीटो शक्ति के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथानेनी हरीश ने कहा कि वीटो केवल विशेषाधिकार नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी भी है। इसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संयम से किया जाना चाहिए, न कि संकीर्ण राजनीतिक हितों को साधने के लिए।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में भारत का पक्ष रखते हुए हरीश ने कहा कि सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत है। उनके मुताबिक, वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए परिषद को अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ उसके फैसलों में व्यापक सहयोग सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
वीटो शक्ति के इस्तेमाल पर भारत ने जताई चिंता
वर्तमान व्यवस्था में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य- अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस- वीटो का अधिकार रखते हैं। इस अधिकार के जरिए कोई भी स्थायी सदस्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव को रोक सकता है।
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि वीटो का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मामलों में बेहद सावधानी से होना चाहिए। उन्होंने इसके ऐतिहासिक इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए कहा कि बार-बार वीटो लगाए जाने से सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा जवाबदेही व्यवस्था वीटो के बार-बार इस्तेमाल को रोकने में पर्याप्त प्रभावी साबित नहीं हुई है।
करीब 200 प्रस्तावों पर 331 बार वीटो का दावा
भारत की ओर से प्रस्तुत बयान में वीटो के ऐतिहासिक रिकॉर्ड का भी जिक्र किया गया। इसके मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में करीब 200 प्रस्तावों पर 331 बार वीटो का इस्तेमाल किया गया है।
हरीश ने कहा कि पांच स्थायी सदस्यों में से दो ने साढ़े तीन दशकों से अधिक समय से वीटो का इस्तेमाल नहीं किया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वीटो या इसके इस्तेमाल की धमकियों का बड़ा हिस्सा कुछ स्थायी सदस्यों की ओर से आया है।
भारत का तर्क है कि वीटो के इस्तेमाल में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक है।
2022 में शुरू हुई जवाबदेही पहल पर भी चर्चा
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2022 में प्रस्ताव 76/262 को अपनाया था। इस व्यवस्था के तहत सुरक्षा परिषद के किसी स्थायी सदस्य द्वारा वीटो का इस्तेमाल किए जाने पर महासभा में चर्चा का प्रावधान किया गया, ताकि सदस्य देश संबंधित मुद्दे पर अपनी बात रख सकें।
हालांकि, भारत की ओर से उठाए गए मुद्दों के अनुसार, इस पहल के बावजूद वीटो के इस्तेमाल को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। भारत का मानना है कि केवल बहस का प्रावधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिषद की कार्यप्रणाली में वास्तविक जवाबदेही भी दिखाई देनी चाहिए।
बिना औपचारिक वीटो के भी रुक सकते हैं फैसले
भारतीय प्रतिनिधि ने सुरक्षा परिषद में ऐसे अवरोधों की ओर भी ध्यान दिलाया, जो औपचारिक वीटो के रूप में दर्ज नहीं होते। उनके मुताबिक, राष्ट्रपति के बयानों, प्रेस वक्तव्यों और प्रतिबंध समितियों के फैसलों पर सहमति बनाने की प्रक्रिया में भी किसी सदस्य की असहमति निर्णय को रोक सकती है।
उन्होंने संकेत दिया कि ऐसी परिस्थितियों में किसी प्रस्ताव या फैसले को रोकने के कारणों को स्पष्ट करना और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना जरूरी है।
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की वकालत करता रहा है। उसका जोर ऐसी व्यवस्था पर है, जो मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से दर्शाए और अंतरराष्ट्रीय शांति तथा सुरक्षा से जुड़े मामलों में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सके।