अन्तर्राष्ट्रीय

संकट का सबसे बुरा दौर तो अभी आना बाकी, सिंगापुर पीएम ने बजा दी खतरे की घंटी

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध ने पूरी दुनिया की नींद उड़ा रखी है. इस तनाव के बीच सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने बेहद डरावनी चेतावनी जारी की है. उन्होंने साफ कहा है कि ग्लोबल इकोनॉमी के लिए सबसे बुरा समय अभी शुरू भी नहीं हुआ है. होर्मुज स्ट्रेट पिछले दो महीनों से बंद है और इसका खामियाजा अब पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है. लॉरेंस वोंग के मुताबिक यह संकट केवल महंगाई तक सीमित नहीं रहने वाला है. सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और आने वाले दिनों में जरूरी चीजों की भारी किल्लत होने वाली है. एशिया के देशों के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा खतरनाक है. क्योंकि ये देश ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह खाड़ी देशों पर ही निर्भर हैं. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्ता माना जाता है. इसके बंद होने से कच्चे तेल और गैस की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है. सिंगापुर पीएम ने कहा कि एशिया के कई देशों में ईंधन की भारी कमी हो गई है. एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें कम कर दी हैं क्योंकि उनके पास पर्याप्त फ्यूल नहीं है. फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन बहुत धीमा हो गया है क्योंकि रॉ मटेरियल समय पर नहीं पहुंच रहा है. यह रुकावट सिर्फ ऊर्जा तक सीमित नहीं रहेगी. आने वाले समय में खाद और भोजन जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा. दुनिया को अब अनाज की कमी का सामना भी करना पड़ सकता है. प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने एक कड़वी हकीकत बयां की है. उन्होंने कहा कि अगर आज होर्मुज स्ट्रेट खुल भी जाए तो भी हालात तुरंत नहीं सुधरेंगे. युद्ध की वजह से बंदरगाहों और ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है. समुद्री रास्तों में बिछाई गई माइंस को हटाना एक बड़ी चुनौती है. जब तक रास्ता पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता तब तक शिपिंग कंपनियां जोखिम नहीं लेंगी. बीमा कंपनियों को भी सुरक्षा का भरोसा दिलाना होगा जिसमें महीनों का समय लग सकता है. इसलिए सप्लाई चेन को दोबारा पटरी पर आने में लंबा वक्त लगेगा. लॉरेंस वोंग ने 1970 के दशक के उस दौर को याद दिलाया जब दुनिया ने ‘स्टैगफ्लेशन’ झेला था. स्टैगफ्लेशन एक ऐसी स्थिति है जिसमें महंगाई आसमान पर होती है लेकिन विकास पूरी तरह रुक जाता है. इस दौरान बेरोजगारी भी बहुत तेजी से बढ़ती है. पीएम वोंग ने कहा कि फिलहाल दुनिया उसी रास्ते पर बढ़ रही है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने भी इस खतरे को लेकर आगाह किया है. अगर हालात नहीं सुधरे तो दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मंदी की चपेट में आ जाएंगी. आम लोगों और कंपनियों के लिए आने वाले महीने बहुत भारी पड़ने वाले हैं. सिंगापुर के पीएम ने साफ कर दिया कि महंगाई का दबाव अब हर सेक्टर में दिखेगा. सबसे पहले पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे और फिर खाने-पीने की चीजें महंगी होंगी. इसका सीधा असर आम आदमी की जेब और सेविंग्स पर पड़ेगा. कंपनियों में छंटनी का दौर शुरू हो सकता है क्योंकि उनकी लागत बढ़ रही है. पीएम ने लोगों से अपील की है कि वे आने वाले मुश्किल समय के लिए तैयार रहें. यह संकट जितना लोग समझ रहे हैं उससे कहीं ज्यादा गंभीर और लंबा होने वाला है.

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