
बाबा बर्फानी के दर्शन की राह देख रहे श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जम्मू-कश्मीर में मौसम के बिगड़े मिजाज ने एक बार फिर अमरनाथ यात्रा की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। शनिवार को जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से श्रद्धालुओं का कोई भी नया जत्था कश्मीर घाटी की ओर रवाना नहीं किया जा सका। लगातार हो रही बारिश और खराब मौसम के चलते प्रशासन ने एहतियात के तौर पर यह फैसला लिया है, ताकि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
हाईवे को खोलने की कोशिशें तो जारी हैं, लेकिन प्रकृति इसमें बाधा डाल रही है। रामबन और उधमपुर जिलों के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर लगातार जारी है। इस निरंतर बारिश के कारण मलबे को हटाने और सड़क को फिर से सुचारू बनाने के काम में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जब तक बारिश नहीं रुकती और सड़क पूरी तरह साफ नहीं हो जाती, तब तक ट्रैफिक बहाली की संभावना कम ही नजर आ रही है।
श्रद्धालुओं की घटती संख्या और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (SASB) ने प्रशासनिक व्यवस्था में कुछ बदलाव किए हैं। पहले तवी रिवरफ्रंट पर श्रद्धालुओं के लिए जो ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन, टोकन वितरण, ई-केवाईसी वेरिफिकेशन और RFID कार्ड जारी करने की सेंट्रलाइज्ड सुविधा थी, उसे अब भगवती नगर बेस कैंप में ही शिफ्ट कर दिया गया है। अब यात्रियों को इन सुविधाओं के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में भटकने की जरूरत नहीं होगी।
इस साल अमरनाथ यात्रा को लेकर भक्तों में भारी उत्साह देखा गया है। 3 जुलाई से शुरू हुई इस वार्षिक तीर्थयात्रा में अब तक लगभग 4.5 लाख श्रद्धालु दक्षिण कश्मीर हिमालय में स्थित पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बने बर्फ के शिवलिंग के दर्शन कर चुके हैं। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब मौसम ने इस यात्रा में खलल डाला हो; इससे पहले भी भारी बारिश और लैंडस्लाइड के कारण यात्रा को छह दिनों तक स्थगित करना पड़ा था।
प्रशासनिक कार्यक्रम के अनुसार, इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा का समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन के पावन पर्व पर होगा। वर्तमान में, यात्रियों की आगे की आवाजाही पूरी तरह से हाईवे की बहाली और इंद्रदेव की कृपा पर निर्भर करेगी। जो श्रद्धालु यात्रा पर निकलने वाले हैं, उन्हें सलाह दी जा रही है कि वे मौसम और सड़क की स्थिति का अपडेट लेकर ही अपनी योजना बनाएं।











